freedom from everything

कभी कभी लगता की कैसी होगी वह जिंदगी जहा कोई बंधन नहो,जब मर्जी हो उठो ,जो चाहे खाओ,जो जी चाहे बोलो,एक आजाद पंछी की तरह, यह भी कोई जीना हा,हर समय सब कध्यान रखो,ऐसे मत बोलो, यह मत करो, किसी को आप बर्दाश्त नही कर सकते फ़िर भी मिलो,बोलो,खातिर करो , कितना अच्छा हो अगर सब कुछ दिल से हो,सिर्फ़ उन लोगो को ही अपने आस पास देखो और रखो जो आप से प्यार करते हैं या आप उन से। कहीं कोई मिलावट नही, कभी आपको बोलने से पहले १० बार सोचना नही पड़ेगा की कहीं इसे बुरा न लग जाए,कोई आयु टू जरूर ऐसी होनी चाहिए या जीवन के कुछ लम्हे,दिन या साल जहाँ कोई पाबन्दी न हो,अगर साल मी १० दिन भी ऐसे मिले टू जीवन मी एक नई शक्ति का संचार करेंगे

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